बर्थडे या एनीवर्सरी... क्यों नहीं!!

 *बर्थडे या एनीवर्सरी... क्यों नहीं!!*

आज कल दो तरह के मुस्लिम्स हैं, एक वो जो कट्टर कहलाते हैं क्योंकि वो बर्थडे एनीवर्सरी का कोई सेलिब्रेशन नहीं करते और दूसरे वो जो मौक़ा ढूंढते हैं सेलिब्रेशन का, खुश होने का। 

तोह कौन सही है क्या सही है और क्यों..?! 


🔹इस्लाम में किसी तरह का कोई बर्थडे एनीवर्सरी सेलिब्रेशन नहीं होता।

ईद उल फ़ितर और ईद उद दुहा के अलावा किसी तरह का कोई जष्न या खुशी मनाने का ख़ास दिन नहीं।


🔹कुछ लोग कहते हैं के सिर्फ़ बच्चों की ख़ुशी या हमारी ख़ुशी के ख़ातिर सेलिब्रेट करते हैं, उसमें क्या परेशानी है, कोई शिर्क नहीं कर रहे! 


🔹कुछ कहते हैं के इस्लाम इतना सख़्त नहीं हैं जितना कुछ लोगों ने बना दिया है, ख़ुश रहना और ख़ुशी बांटना तोह नेक काम होता है, आदि।


🔹तोह यह बातें वो लोग करते हैं जिनको इल्म नहीं होता या असलियत को अनदेखा करते हैं। हमे यह समझना चाहिए के यही ज़िन्दगी का इम्तेहान है, अपने नफ़्स को मारना और मुश्किल को आसानी से अल्लाह की रज़ा के लिए करना।


🔹आप नबी सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम ने फ़रमाया के "जो कोई भी दूसरी क़ोमों (यहूद,नसारा) के नक़्शे क़दम पे चलेगा, वो उन्ही मे से होजाएगा।

【हदीथ 3512, सही अबु दावूद】


🔹क़ुरान मे अल्लाह फ़रमाता है कि - "आज के दिन मैं ने तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन मुकम्मल कर दिया है, अपनी नियामतें अता कर दी हैं, और इस्लाम को चुना है तुम्हारे दीन के तौर पे। 

【सूरह अल माएदा, आयत :3】


इन दोनों बातों से यह बात पक्की हो जाती है के अल्लाह ने जिन बातों को करने का हुक़्म दिया और जिनसे रोका है हमें उतना ही करना है, ना उससे कम ना उससे ज़्यादा।

यही तोह असली अक़ीदह है के हम दूसरों के अक़ीदों पे ना चलें, सिर्फ़ वो करें जो हमें सिखाया गया है भले ही वो हमें अच्छा लगे करना।


लिहाज़ा हम आज के वक़्त की चंद ख़ुशियों को नज़रअंदाज़ करके अपने रब की फ़रमाँबरदारी करें बजाए अपनी खव्हिशों के पीछे चलने के और अपने हिसाब के दिन को आसान बनाए।