ग़ुस्सा... शैतान का हथ्यार!*

 *ग़ुस्सा... शैतान का हथ्यार!*


रोज़े में हम अपनी भूख प्यास पे आराम से क़ाबू कर लेते हैं, खूब इबादत भी करते हैं, लेकिन अक्सर हम एक बात पे क़ाबू नहीं कर पाते और वो है ग़ुस्सा!! 


रमज़ान हों या न हो, रोज़ा हो या न हो ग़ुस्से को हमे कभी भी ख़ुद पर हावी नही करना चाहिए। 

यही सीख हमें क़ुरआन और हदीथों से मिलती है। इस दुनिया मे आधे से ज़्यादा जुर्म गुससे मे होते हैं, ग़ुस्से मे कही बात की वजह से लोगों के दिल टूटते हैं और रिश्ते ख़राब होते हैं।


*"जो ख़ुश हाली और बद हाली मे अपना माल अल्लाह के रास्ते में ख़र्च करे, अपने ग़ुस्से को पी जाए और लोगों को माफ़ कर दे, अल्लाह ऐसे नेक लोगों से मोहब्बत करता है।"*

[सूरह आले इमरान, आयत 134]


*"हम में से वो शक़्स ताक़तवर नहीं जो दमदार कुश्ती लड़े बल्कि वो शक़्स है जो अपने ग़ुस्से पे क़ाबू पा ले"*

[ सही मुस्लिम, बुक 32, हदीथ 6313] 


*"ग़ुस्सा शैतान से आता है, शैतान आग से बनाया गया है, आग पानी से बुझती है, तोह तुम मे से किसी को ग़ुस्सा आए तोह वुधु कर लिया करो।"*

[ अबु दावूद, बुक 36, हदीथ 4766 ]


*"अबु हुरैरा (र.अ) ने आप नबी सल्लल्लाहु अलैही वसल्लम से पूछा के आप मुझे एक अच्छी राय दीजिए, आप सल्ललाहु वसल्लम ने फ़रमाया, ग़ुस्सा मत किया करो, अबु हुरैरा ने दोबरह पूछा , फिर उनको यही जवाब मिला, तीसरी बार पूछा और फिर से आप सल्लाहु वसल्लम ने यही फ़रमाया के ग़ुस्सा मत किया करो।"*

[ सही बुख़ारी : बुक 73, हदीथ 137 ]


ऐसी कई हदीथों से हम यह सीखते हैं के ग़ुस्सा शैतान का एक तीर है जिससे हम को अल्लाह से पनाह मांगनी चाहिए और अपने माइंड की एक्सरसाइज़ करते रहना चाहिए के ख़ुद को मज़बूत बनाए। 


अल्लाह हम सबको हिदायत दे और अपने नफ़्स का ग़ुलाम बनने से बचाए, आमीन।  


                                   Zamzam khan.