रोज़े का टूटना...कब कैसे क्यों..??!!

 रोज़े का टूटना...कब कैसे क्यों..??!!


रोज़ा एक ऐसी इबादत है जो हम ख़ालिस अल्लाह तआला के लिए करते हैं, बाक़ी सारी इबादत इंसान ख़ुद अपने लिए करता है। पर रोज़ा टूटने की वजाओं को लेकर अक्सर लोगों को कुछ ग़लत फ़हमियां रहती हैं।


आइये, इन ग़लत फ़हमियों को थोड़ा दूर करते हैं और सही वजाओं की याद दिहानी करते हैं जो सहि हदीथों से साबित हैं..... 


➡️ *रोज़ा किन चीजों से नहीं टूटता और वो काम जो हम रोज़े में कर सकते हैं*-


1. तबियत ख़राब होने की वजह से ख़ुद ही जब उल्टी हो जाए तोह रोज़ा नहीं टूटता।

2, टूथपेस्ट माउथवाश मुह में लेने से, अगर हलक़ तर हो ग़लती से तोह भी नहीं क्योंकि कोई भी खाने पीने की चीजों से जिन से शारीर को ताक़त मिले उससे रोज़ा टूटता है। मतलब रोज़े में हम आराम से दाँत ब्रश कर सकते हैं, वैसे मिस्वाक या दातुन करना सुन्नत है।

3. जिन इंजेक्शन से शरीर को खाने जैसी ताक़त नहीं मिलती, जैसे इन्सुलिन, दर्द आदि के इंजेक्शन से रोज़ा नही टूटता, लेकिन बेहतर माना गया है के इफ़्तार के बाद लगे इंजेक्शन।

4. शोहर बीवी एक दूसरे को गले लगाएं या यूँही थोड़ा छूएं तोह इसमे कोई हर्ज नहीं।

5. लिपस्टिक क्रीम लगाने से, क्योंकि इससे हमारे जिस्म को कोई ताक़त नहीं मिलती।

6. गरम पानी की भाँप लेने से।

7. किसी जांच के लिए ज़रा सा ख़ून देने से। 

8. कहीं चोट लगने से ख़ून बहने से।

9. ख़ून डोनेट करने से, लेकिन बेहतर माना गया है के इफ़्तार बाद करें।

10. ग़लती से ग़फ़लती में कुछ खाने पीने से। 

11. बुरे अल्फ़ाज़ या गालियाँ देने से, लेकिन इससे रोज़े का अज्र कम होता है। 


➡️ *अब देखते हैं रोज़ा किन  चीज़ों से टूटता है और रोज़े मे हमें क्या नहीं करना चाहिए*


1. शोहर बीवी के संबंध होने से जो के रोज़े की हालत में सबसे बड़ा गुनाह होता है।

2. जान बूझ के उल्टी करने से!! इंसान रोज़े की हालत में मुह में उंगली डाल के य किसी और तरीके से ख़ुद की मर्ज़ी से उल्टी करे तोह रोज़ा टूट जाता है। 

3. सिगेर्रेट या बीड़ी स्मोक करने से। 

4. कोई भी फ़हशा हराम काम करने से।

5. ग्लूकोज़ के इंजेक्शन से क्योंकि इससे शरीर को खाने की तरह ताक़त मिलती है।

6. औरतों की महीने की प्रॉब्लम से।

7. जान बूझ के हलक़ तर करने या कुछ खाने से।

8. ख़ून चढ़ने से, क्योंकि इससे इंसान के शरीर को ताक़त मिलती है।


अल्लाह रब्बुल आलमीन हमें सही रोज़े रखने की तौफ़ीक़ दे जिसमे सिर्फ़ हमारे पेट का ही नही, हमारी ज़ुबान, आंखें, दिल का भी रोज़ा हो।


                      Zamzam khan