वो नेक अमल जो देखा जाए हम पे फ़र्ज़ नहीं लेकिन फ़र्ज़ जितना एहम है पर अक्सर हम इसकी सही एहमियत को नज़र अंदाज़ कर देते हैं वो है "सदक़ा" । क़ुरआन और हदीथों में कई बार इसके बारे में हमें समझाया गया है...
*"जो लोग अपना माल अल्लाह के रास्ते मे ख़र्च करते हैं, उनकी मिसाल ऐसी है जैसे एक भुटटे का दाना सात बाले उगाये, और हर बाली में सौ दाने हों, और अल्लाह जिसके लिए चाहता है सवाब मे कई गुनाह इज़ाफ़ा कर देता है, अल्लाह बोहुत वुसअत वाला इल्म वाला है।"*
【सूरह अल बक़रह, आयत 261】
*"जो लोग अपना माल अल्लाह के रास्ते में ख़र्च करते हैं और फिर ना उसका कोई एहसान जताते हैं और ना ही कोई तकलीफ़ पोहुँचाते हैं, तोह (आख़ेरत में) वो अपना सवाब अपने रब के पाएंगे, औए ना उन्हें कोई ख़ौफ़ होगा और ना ही कोई ग़म।"*
【सूरह अल बक़रह, आयत 262】
*"अल्लाह तुम्हे इस बात से मना नहीं करता के जिन लोगों ने दीन के मामले में तुमसे जंग नही की और ना तुम्हें घरों से निकाला हो,तोह तुम उनके साथ कोई नेकी या इंसाफ़ का मामला करो, यक़ीनन अल्लाह इंसाफ़ करने वालों को पसंद करता है।* ( मतलब जो ग़ैर मुस्लिम जिसने कभी हमारे साथ कुछ बुरा न किया हो, हमे उसको भी सदक़ा दे सकते हैं।)
【सूरह अल मुमताहना, आयत 8】
*जब कोई इंसान मरता है, उसकी इबादतें भी उसके साथ खत्म हो जाती हैं सिवाए तीन के, उसका दिया हुआ सदक़ा, उसका बांटा हुआ इल्म जो दूसरों को फ़ायदा दे, और नेक औलाद।*
【सही बुख़ारी, बुक 13, हदीथ 4005】
*सदक़ा दौलत को कभी कम नही करता, जो सदक़ा देता हो, माफ़ करता हो और नरमी से पेश आता हो, अल्लाह उसके दर्जे बुलंद कर देता है।*
【 सही मुसलिम, बुक 032, हदीथ 6264】
*अपने आप को जहन्नम की आग से बचाओ सदक़ा दे के चाहे वो एक आधी खजूर ही क्यों ना हो और वो भी नही काट सकते तोह मुह से अच्छे शब्द निकालो।*
【 सही मुस्लिम, सही बुख़ारी, 】
➡️और भी ऐसी कई बार हमे अल्लाह ताआला और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने समझाया है के सदक़ा देने से हमारे माल मे बरकत होती है, गुनाह माफ़ होते हैं, बुराई टलती है और अल्लाह को पसंद आते हैं ऐसे अमल करने वाले मोमि
➡️*सदक़ा सिरफ़ पैसों का नही होता, हम अपनी जान से कुछ मेहनत करके दूसरों को फ़ायदा दे सकते हैं। कोई भी अछी बात, अच्छा अमल, नेक काम , जान से माल से दूसरों को फ़ायदा दे वो सदके मे शुमार होता है।*
writer =zamzam khan