*दुआ है...ए परवरदिगार...*

 *दुआ है...ए परवरदिगार...*


धर्मों और जाति में बटे हैं हम

सूझी है अबतक हमें सिर्फ़

मंदिर मस्जिद की जीत हार..

बने हैं सभी मिट्टी के गाढ़े से

हम सबकी हिफ़ाज़त फ़रमा ए परवरदिगार।।


पैसों में कुछ डूबे हैं

पैसों से कुछ हारे हैं

ला सबकी ज़िंदगी में नई बहार.. 

सबकी मदद फ़रमा ए परवरदिगार।।


कोई बजा रहा है मंदिर में घंटियां

कोई लगा रहा है सजदों में पुकार..

हर एक को निजात दे इस बिमारी से

सुन ले दुआ सबकी ए परवरदिगार।।


घरों में बंद हम बैठे हैं

बंद पड़ें हैं सारे स्कूल, कारख़ाने और बाज़ार..

इस मुश्किल वक़्त को आसान बना दे

सिर्फ़ तू ही कारसाज़ है ए परवरदिगार।।


रमज़ान के इस पाक महीने में

इंसान के सेहत के साथ जीने में

बरकतें नाज़िल कर बेशुमार..

फ़रयादें पूरी कर ए परवरदिगार।।


रोज़ घुट के मर रहा है बेबस इंसान

जगह नहीं, भर गए हैं क़ब्रस्तान

बिखरने ना दे हमारे सब्र का मयार..

हम सब को बख़्श दे ए परवरदिगार।।


इस वबा को हवा से साफ़ करदे

सबके गुनाहों को माफ़ करदे

कोई ना हो अपनी साँसों से बेज़ार..

हर एक पे रेहम फ़रमा ए परवरदिगार।।


- ज़मज़म ख़ान